जो जिसकी नीयत करता है उसे हासिल कर लेता उसके लिए उपयुक्त गतिविधि करना पड़ता है, इसलिए सपनों में न बस कर हकीकत में अपनी इच्छाओं को उतारने की जरुरत है।
जब तक इंसान जोखिम नहीं लेता उसे कोई साधन नहीं मिलता है, क्यूंकि जब तक कोई सफल नहीं होता उसे असफल होने का भय लगा रहता है।
इंसान पैसा कमा कर अपनी कार्य-शैली बदल सकता है मगर जीवन-शैली नहीं, क्यूंकि जगत में संस्कार से छवि बनते हैं न कि विरासतों से।
पैसा एक ऐसा संपत्ति है जो इंसान को अपनी औकाद बता देता है, क्यूंकि पैसों के रख-रखाव पर इंसान अपना सब कुछ दांव पर लगा सकता है।
इंसान पैसों से जिंदगी बना सकता है तो बिगाड़ भी सकता है, इसलिए दौलत का आगमन हो तो अहंकार कभी न आने दें, अहंकार इंसान की संपत्ति दीमक की तरह चाट जाती है।
पैसा ही इंसान की आत्म निर्भरता का स्रोत है, क्यूंकि खाली हाथ होने पर ही किसी पर आश्रित होने की जरुरत पड़ती है।
कोई भी सार्थक प्रयास करने से पहले इंसान को स्वतंत्र होना पड़ता है, क्यूंकि शुरुआत करने से पहले अपनी क्षमता की आवश्यकता पड़ती है।