इंसान के जीवन में तीन बाध्य आते हैं; धर्म, शासन एवं युद्ध। क्यूंकि धर्म में जन्म लेकर वो धर्म को ही सब कुछ समझ बैठता है, शासन उसकी आज़ादी पर रोक लगा देता है तथा युद्ध उसके मृत्यु का कारण बन जाता है। अतः हमें इन सबों से अलग अपने जीवन में एक पहचान बनाने की जरुरत है।

जब तक पुष्प पूर्ण रुप से नहीं खिलता है उसमें से सुगंध नहीं आती है, ठीक इसी तरह इंसान जब तक अपना कर्त्तव्य जान नहीं लेता है उसे कुछ समझ में नहीं आता है। कहने का अर्थ यह है कि फूल को वाष्प देने पर वह इत्र बन जाता है मगर कचड़े को गर्मी देने से वह सड़ जाता है हमें मालूम है कि सड़ी चीज़ें बदबू देती है।

जब तेज़ हवाएं चलती है तो बादल फट कर विभिन्न स्थानों पर वर्षा कराती है, यदि सारे बादल इकट्ठा हो जाएं तो धरती सैलाब में डूब जाएगी, यही अंतर होता है एकता एवं स्वतंत्रता में; एकता इतिहास दोहराने की प्रेरणा देता है तो स्वतंत्रता नवीनतम विचारों को लागू करने की सीख देता है।

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