
जब तक पुष्प पूर्ण रुप से नहीं खिलता है उसमें से सुगंध नहीं आती है, ठीक इसी तरह इंसान जब तक अपना कर्त्तव्य जान नहीं लेता है उसे कुछ समझ में नहीं आता है। कहने का अर्थ यह है कि फूल को वाष्प देने पर वह इत्र बन जाता है मगर कचड़े को गर्मी देने से वह सड़ जाता है हमें मालूम है कि सड़ी चीज़ें बदबू देती है।
