जैसा कि हम जानते हैं सूर्य की किरणें जब धरती से टकराती है तो सूर्य की रौशनी बढ़ जाती है तथा अवशोषित होता है तो धरती पर बसंत खिल जाता है, ठीक इसी प्रकार जब इंसान ईमानदार होता है तो उसमें दो गुण सम्मिलित हो जाते हैं।
जैसे हीरा कठोर होने के कारण उसमें तन्यता नहीं होती है, उसी प्रकार कट्टर स्वावलंबन वाले व्यक्ति में धैर्य नहीं होता है। यधपि जिस इंसान में धैर्य नहीं होगा वह ईमानदार नहीं हो सकता है।
बच्चे स्वतंत्र होते हैं उन्हें डराने की कोशिश न करें, क्यूंकि बिजली के तार में अवांछनीय पदार्थ लगने से उसकी चाल कम हो जाती है, अतः उन्हें ज़िम्मेदार बनाया जाए।
जैसे घर्षण से ऊर्जा उत्पन्न होती है, उसी प्रकार इंसान के संघर्ष से अच्छे परिणाम मिलते हैं, अतः हमें हमेशा लाभकारी कार्यों की तरफ़ बढ़ना चाहिए।