ईर्ष्या एवं साहस में अंतर यही है कि ईर्ष्या इंसान को उत्तेजित कर देती है मगर साहस इंसान को आंकलन करने का हुनर सीखा देता है, क्यूंकि वर्षा बादल के घना होने से नहीं होता है बल्कि वायुमंडल के अस्तित्व पर निर्भर करता है।
जिस इंसान के अंदर कमी बर्दाश्त करने की क्षमता न हो तो वह मौत के बिलकुल करीब हो जाता है, क्यूंकि बारिश हमारे खेतों में हरियाली देने का काम करता है मगर कोई उसे बुरा समझे तो उसमें प्रकृति का दोष नहीं है।
जैसे डर इंसान को रोक देता है वैसे ही भ्रम भी इंसान के पछतावा का कारण बन जाती है, क्यूंकि बादल तो आता है मगर वर्षा मानसून देख कर होती है।
यदि इंसान एक ही आचरण में डूबा रह जाए तो उसे ऊब जाना पड़ता है, क्यूंकि तरल पदार्थ पर तापमान बदलने से वह कठोर हो सकता है या गैस बन कर उड़ सकता है।