जिस प्रकार धारा के प्रवाह से विद्युत उत्पन्न होता है, वैसे ही इंसान की गति से तकनीक वजूद में आता है, अतः हमें कम समय लगाकर अधिक कार्य को संपन्न करने की जरुरत है।

बच्चों को कहानियां सुनने से ज़्यादा उसे सोचने में मन लगता है, क्यूंकि विद्युत तो यूंही प्रवाह करता है मगर विभव बढ़ाने में आवेश सहयोग करता है, अतः बच्चों को प्रायोगिक ज्ञान दिया जाए।

जैसे हम सांस ऑक्सीजन के रुप में ग्रहण करते हैं, वैसे ही हम कुछ किताबों से दिल लगाएंगे तभी हमारे अंदर की आत्मा जागेगी।

जैसे वृक्ष का जड़ खोखला हो जाए तो उस पेड़ का तना भी सूख जाएगा, उसी प्रकार समाज में पुरुष से ऊपर महिला हो जाए तो समुदाय ध्वस्त हो जाएगा।

जो वास्तविक है वह उम्दा होने का संकेत स्वतः दे देता है मगर जो काल्पनिक होता है वह छुप जाता है जो गर्हित बन जाता है, क्यूंकि बारिश की बूंदे पक्की ज़मीन पर पड़ती है तो बह जाती है तथा कच्ची जमीन पर पड़ने से कीचड़ हो जाता है।

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