जैसे आराम के लिए रात की जरुरत पड़ती है तथा काम करने के लिए दिन की जरुरत पड़ती है, उसी प्रकार इंसानियत बचाने हेतु इंसान को अलग-अलग व्यवसाय में प्रवेश करना पड़ता है।

जैसे पत्थरों को पीस कर सीमेंट बनाया जाता है फिर उससे मकान तैयार किए जाते हैं, उसी प्रकार एक कार्य को बार-बार करने से वह मजबूत बन जाता है।

जैसे चंद्रमा एक रेखा से वृत्त बन कर पूर्णिमा की प्रकाश देता है, उसी प्रकार एक बड़े कार्य को छोटे-छोटे हिस्सों में समग्र किया जा सकता है।

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