जब इंसान बड़ा होने का दावा करें तो उसे नास्तिक कहते हैं लेकिन जिसे बिना देखे विश्वास कर लिया जाए उस भय को ईश्वर कहते हैं।

वफादारी गैसीय पदार्थ की तरह होता है खुलने पर हवा में मिल जाता है, अतः स्वार्थी बनो ताकि कोई गलत फायदा उठाने की कोशिश न करें।

विनम्रता तरल पदार्थ की भांति होता है जिस आकार में ढालना चाहें उस आकार में ढल जाएगा, अतः कठोर बनो ताकि तेरे स्वतंत्रता पर कोई रोक न लगा सकें।

किसी भी कार्य में सरलता लाने हेतू स्वयं सरल बनना पड़ता है, क्यूंकि पत्थर को काटने के लिए कठोर लोहे की जरुरत है।

इंसान के मरने के बाद चार रुपांतरण होते हैं; पशु, पक्षी, कीड़ा, कीटाणु की उत्पत्ति होती है। व्यवसाय में भी चार प्रकार के लोग होते हैं; विरोधी, संतुष्ट, मनोबल, सफल की व्याख्या होती है।

ज़्यादा सकारात्मक होना शीत को बढ़ावा देता है तथा ज़्यादा नकारात्मक होना ग्रीष्म को बढ़ाता है, क्यूंकि सर्दी आसमान की सतह से आता है तथा गर्मी धरती की परत से आता है, इसलिए संतुलित जीवन प्रकृतिवाद की रक्षा करता है।

पृथ्वी के नीचे पड़े पानी का तापमान बढ़ने पर भूकंप आता है, वैसे ही अपने जेरे तहत लोगों में ईर्ष्या उत्पन्न करने पर समाज का सारा ढांचा बिगड़ जाता है।

जिस प्रकार पृथ्वी के क्षय को अवांछनीय पदार्थ बचाती है, उसी तरह सकारात्मक विचार को नकारात्मकता रोकती है।

जो पक्षपाती नीति रखता है उसके पक्षधर नहीं होते हैं, क्यूंकि पानी अपना मार्ग खोज लेता है लेकिन अवरोध उसकी दिशा में परिवर्तन लाता है।

जब इंसान अपना हद पार करता है तो उसके कार्य का संतुलन बिगड़ने लगता है, क्यूंकि नाव भंवर में जाने पर डूब जाता है।

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