अहंकार में डूबने से दिमाग़ उबलने लगता है, अतः लोगों से संवाद कायम करें ताकि आप में थोड़ी विनम्रता की जगह बन जाए।
अधिक इच्छा पाचन-क्रिया को निष्क्रिय बना देता है, अतः अपना एक सिद्धांत रखें उसी के अनुकूल जीवन यापन करें।
ज़्यादा मज़ा लेने पर नींद उड़ जाती है तथा अधिक बर्दाश्त करने पर नींद बढ़ जाती है, अतः रक्त के संचार हेतू चिकित्सक के परामर्श अनुसार नींद लेने की कोशिश करें।
यदि आप स्वास्थ पर ध्यान नहीं देंगे तो कमतर हो जाएंगे मगर आप स्वास्थ को बेहतर बनाने पर अपना टास्क पूरा करने लगेंगे तो उम्दा इंसान बन जाएंगे।
थकान की चिंता करने पर शरीर आलसी बन जाता है तथा शरीर को बचाने की सोचने पर गुस्सा आने लगता है, अतः उचित आदत को अपने दिनचर्या में शामिल करें ताकि शरीर का संतुलन बना रहे।
यदि आप अतीत को याद करेंगे तो अफसोस के अलावा कुछ नहीं मिलेगा तथा भविष्य को याद करेंगे तो हड़बड़ाहट में अपना वर्तमान गंवा देंगे, अतः वर्तमान के कार्य पर ध्यान केंद्रित करें अतीत से सीख मिलेगा तथा भविष्य स्वतः बनता जाएगा।
यदि मृत्युंजय के संदर्भ में शोक जताने से आत्मा को शांति मिलती तो इस जगत में मरने का कोई प्रचलन नहीं होता, क्यूंकि ईश्वर के हृदय में सारी आत्माओं का संग्रह होता है उस संग्रह को जागृत करने हेतू स्वयं को भगवान सिद्ध करना पड़ता है।
एकेश्वरवाद समाज में अवसरों पर प्रहार करता है, यदि केवल सूर्य की पूजा होगी तो धरती माता की गोद खाली रह जाएगी, अपितु बहुदेववाद हर इंसान को अपनी क्षमता प्रकट करने का मौका प्रदान करता है।
यदि हृदय में सदभाव हो तो पूरा संसार शत्रु बन जाए फिर भी आप का कुछ नहीं बिगड़ेगा, क्यूंकि सूर्य अपने प्रकृति में बदलाव करके भी अब तक चमक रहा है।
महिला की रक्षा करना समाज की सेवा में पूरी ज़िंदगी लगाने के समान है, क्यूंकि पुष्प खिलने से पहले तोड़ लेने पर उसकी सुगंध नष्ट हो जाता है।