बच्चों को स्वादिष्ट आहार ही कराएं, क्यूंकि स्वादिष्ट पदार्थ जल्दी पचता है, अतः हल्का भोजन लेने से उनके शरीर की स्फूर्ति बनी रहेगी।

बच्चों को बर्बादी का ढंग न सीखा कर रुपांतरण का तरीका सीखाना चाहिए, क्यूंकि उनके द्वारा छोड़ा गया कार्बन-डाइ-ऑक्साइड का ऑक्सीजन में परिवर्तित होने से ही गति बढ़ेगा।

बच्चों को स्वाधीनता देकर उन्हें ज़िम्मेदार बनाना चाहिए, क्यूंकि उनके शरीर में संचार करने वाला रक्त तेज़ी से चलेगा तभी शरीर का पोषण बढ़ेगा।

बच्चों को आसान तरीका बताना चाहिए ताकि मनोरंजन उसके दिल में इच्छा उत्पन्न कर दे, क्यूंकि मस्तिष्क में प्रवाह करने वाला हार्मोन उसे प्रसन्न नहीं करेगा तब तक वह मेधावी बालक नहीं बन सकता है।

ईर्ष्या हार्मोन के संचार को बंद करता है तथा दया हार्मोन के संचार को चालू करता है, अतः प्रशंसा के बयार में अपने संतान को न भूल जाएं।

इंसान जैसी आवाज़ को पसंद करता है उसके कंठ से वैसी ही ध्वनि निकलती है, अतः दिल में जो इच्छा हो उसे पूरा करने का इरादा बना लेना चाहिए।

यदि दुर्गंध प्यारा लगने लगे तो श्वसन-क्रिया की अवधि लम्बी हो जाती है इससे नकसीर की समस्या आ सकती है, अतः अपने आस-पास सुगंध का रख-रखाव करें।

ज़्यादा व्यस्त रहने पर हाथ-पैर कांपने लगता है, अतः बाहरी बोझ अपने शरीर को न दें ताकि आप अपंग होने से सुरक्षित रहें।

अधिक स्पष्टवादी होने पर त्वचा का रंग बदलने लगता है, अतः आरक्षित व्यक्ति बन कर अपनी सुंदरता बरकरार रखें।

सतर्क न रहने पर हृदय बेचैन हो जाता है, अतः अपने अंदर कुछ स्वीकार करने की क्षमता रखने का साहस करें।

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