लड़ने की विचारधारा से दूर रहने की जरुरत है, क्यूंकि हर इंसान समान है उसे सही मार्ग-दर्शन देने पर वो आसमान का सफ़र तय कर सकता है।

यदि जीवन में हारने की चाहत नहीं है तो अच्छे गुरु बनाएं, क्यूंकि धरती से आकाश नज़र आता है मगर उसकी दूरी हमें नहीं मालूम है।

ज़िंदगी संतुलित करने के लिए चरित्र एवं व्यवहार में संयम जरुरी है, क्यूंकि वृक्ष अपनी ऊर्जा से बढ़ता है मगर अचानक आने वाली आंधी उसे हिला सकती है।

बदनामी के डर से शर्माने पर इंसान को हर तरफ़ से रोकने की कोशिश करता है, क्यूंकि चांद में निरंतरता न होने पर चमक कम है मगर सूर्य हमें पूर्ण रुप से प्रकाशित करता है।

यदि आप बहु-प्रतिभावन बनना चाहते हैं तो लोगों से घनिष्ठ संबंध रखें, क्यूंकि इस जगत में हर वस्तु हमारे काम की है उसे उपयोग में लाने का कौशल सीखने की जरुरत है, अतः हर क्षेत्र में अवगुण के साथ-साथ विशेषता भी पाई जाती है।

इंसान अपने ही दोष से हारता है तथा अपने गुण से जीत जाता है, क्यूंकि तापमान के बढ़ने या घटने से जलवायु का संतुलन बिगड़ने लगता है।

जिंदगी में स्वतंत्र होने के लिए आत्म-रक्षा बहुत जरुरी है, क्यूंकि वस्तु अपनी गति से चलता है मगर हवा उसमें अवरोध उत्पन्न करता है।

धर्म पर कत्ल एक अभिशाप है जो इंसानियत को मार देती है, क्यूंकि धर्म का प्रमाण तलाश करने में समय लगाने पर इंसान स्वयं को ढूंढ पाने में असमर्थ सिद्ध हो जाता है।

इस धरती पर तीन प्रकार के लोग होते हैं; समर्थक, विरोधी तथा पाखंडी। समर्थक आप को प्रसन्न कर देगा, विरोधी सतर्क कर देगा अपितु पाखंडी आप के मंजिल के रास्ते को हमेशा मोड़ने की कोशिश करेगा।

इच्छा सबसे बड़ा धरोहर है, क्यूंकि उम्मीद तो इंसान को सिर्फ़ सब्र देता है, अतः बगैर इच्छा के आप अपना दायरा नहीं बढ़ा सकते हैं, यधपि सूर्य किसी ग्रह पर निर्भर हो जाए तो हम रौशनी हेतू तरस जाएंगे।

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