पानी को पौधा खाता है, पौधों को पशु-पक्षी खाते हैं, पशु पक्षी को इंसान खाता है, सवाल यह बनता है कि मनुष्य को कौन खाता है; पानी स्वर्ग की उत्पत्ति है तथा आग नरक की उत्पत्ति है, अतः हम स्पष्ट रुप से कह सकते हैं कि स्वर्ग इंसानों को उपलब्ध कराता है तथा नरक उसे खा जाता है।
झाड़-फूंक इंसान के मरने के बाद किया जाता है जीवित इंसान पर ऐसा प्रयोग करने से उसकी बीमारी बढ़ती है, क्यूंकि हरे पेड़ पर गर्म हवाएं छोड़ने से वह सूख जाता है तथा निर्जीव पत्ते झड़ने लगते हैं, अतः आप इबादत में विश्वास करते हैं तो केवल ईश्वर की भक्ति करें।
जैसे पानी पर नाव को बिछा दो तो तैरने लगता है उसे खड़ा कर दो तो डूब जाती है, इसी तरह रहनुमा झुक जाए तो समाज विकसित बन जाता है यदि इंसान घमंडी हो जाए तो समाज बिखर जाता है।
जैसा कि हम जानते हैं पेड़ पौधों को पानी की जरुरत है इंसानों को ऑक्सीजन की जरुरत है, यानि कि हर इंसान में कोई न कोई गुण होता है उस गुण को स्वीकार करने की जरुरत है, कहने का अर्थ यह है कि विभिन्नता ही इस सृष्टि का रक्षक है।